पहाड़ के कई लोगों की तरह, सालों शहर में मौके के पीछे रहे — अब इनयूके बना रहे हैं ताकि अगली पीढ़ी को कभी घर और भविष्य में से एक न चुनना पड़े।
हम इनयूके को उत्तराखंड से बना रहे हैं — उन्हीं लोगों के क़रीब जिनके लिए हम हैं। वे जो हमें यहाँ तक लाए, वे जो अभी बना रहे हैं, और शायद अगले — आप।
मनी और रोमा — पहाड़ों के लिए इनयूके बनाते संस्थापक, और आगे की हर चीज़ के पहले दो चेहरे।
पहाड़ के कई लोगों की तरह, सालों शहर में मौके के पीछे रहे — अब इनयूके बना रहे हैं ताकि अगली पीढ़ी को कभी घर और भविष्य में से एक न चुनना पड़े।
तकनीक में लगभग दो दशक, KEC द्वाराहाट से इंजीनियर, अब प्रोडक्ट मैनेजमेंट में MBA कर रही हैं — यह सब घर लाकर उसी समुदाय के लिए बना रही हैं जहाँ से वे आती हैं।
एक छोटी-सी टीम, जो सपने को एक जीते-जागते प्रोडक्ट में बदल रही है।
यहाँ का हर नाम कुछ न कुछ देकर गया — कोड, हुनर, पूँजी, हिम्मत या बस अपनापन — तब, जब दिखाने को कुछ भी नहीं था। सबसे पहले वालों से शुरू।
हमारा पहला कोड लिखा।
हर शुरुआती दिमाग़ को राह दिखाई।
ऑफ़िस के लिए देहरादून की पहली टोह।
इसे इसका पहला चेहरा दिया।
स्टैक को सोचना सिखाया।
शुरुआत में ही हमारा नाम फैलाया।
हमारा दरवाज़ा खुला रखा।
हर वक़्त साथ खड़े रहे।
हमें चलते-फिरते कैद किया।
हमारे पहले शब्द ढूँढे।
हमारा पहला रूप गढ़ा।
गाड़ी को थामे रखा।
सपने को राह दिखाई।
मालिक बनकर हमारा साथ दिया।
भरोसा किया, और पैसा लगाया।
बनाया भी, साथ भी दिया।
रोज़ का कामकाज सँभाला।
घर-घर जाकर बेचा।
हिसाब-किताब ईमानदार रखा।
अच्छे लोगों को जोड़ा।
हर बग पकड़ा।
यात्रा और टैक्सी ऑपरेशंस चलाए।
रोज़ काम पूरा करवाया।
भरोसे के हाथ।
दिल से पिच किया।
लोगों का दिल जीता।
हमारे सबसे अच्छे पल कैद किए।
हर कॉल का जवाब दिया।
शब्दों का बहाव बनाए रखा।
हमारी पहुँच बढ़ाई।
हमें और आगे धकेला।
बात फैलाई।
होटल इंडस्ट्री को समझने में हमारी मदद की।
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